Papa Men- Dream has no age

 

ये किताब मैंने दो दिनों में ही पढ़कर ख़तम कर दिया । वजह यह है कि लेखक ने बड़े ही सहज तरीके से ज़िन्दगी जीने का तरीका बता दिया है ।

हम सब जिंदगी की आपाधापी में यह भूल जाते हैं कि हमने अपने किसी डायरी में अपने सपनों को लिखा भी था । लेकिन दाल रोटी कमाने के चक्कर में वो डायरी धूल खाने लगती है और हम भी एक रोबोट की भांति जीवन जीने लगते हैं ।

ये कहानी भी ऐसे ही व्यक्ति चंद्रप्रकाश गुप्ता की है जो संगीत को भगवान समझता है लेकिन जब वो अपने लक्ष्मी और सरस्वती के सपनों को पूरा करने के चक्कर में अपने ही भगवान की पूजा करना भूल जाता है ।

लेकिन किसी अघोरी बाबा से ‘ जीवन नश्वर है ‘ सुन उसके अंदर भी अपने सपनों को पूरा करने की हिम्मत बढ़ती है और चंद्रप्रकाश गुप्ता गाने के मौक़े तलाशने लगता है | इसी चक्कर में कभी वो शादी में गाता है तो कभी मुंडन में |

ऐसा नहीं है कि यह किताब सिर्फ़ सपनों को पूरा करने के जद्दोजहद में भी ख़तम हो जाती है। बल्कि इस किताब में बाप और बेटियों के रिश्तों को भी बड़े ही खूबसूरती से दिखाया गया है । इसी वजह से इस किताब का नाम भी पूरी तरह सार्थक हो जाता है ।

बहुत दिनों बाद ऐसी अनोखी किताब पढ़ी । चूँकि इस कहानी पर फिल्म बन रही है तो आपको कुछ जगह बनावटी भी लग सकते हैं | जैसे चंद्रप्रकाश गुप्ता  का गैरेज़ में छुपकर गाना और किसी को इसकी भनक भी नहीं लगना | लेकिन फिर भी कहानी प्रेरणादायक है और अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करता है|

अगर आपको रिश्ते निभाना सीखना है तो यह किताब पढ़े । अगर आपको सपनों के लिए जीना है तो यह किताब पढ़े । अगर सिर्फ़ मनोरंजन चाहिए तो भी यह किताब पढ़े।

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